सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3

भाग 3 / 4Sikkim Series
Aashish ChawlaलेखकAashish Chawla⏱ 14 मिनट पढ़ें👁 2,379 बार देखा गया
सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3

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मेरे पिछले ब्लॉग में आपने पढ़ा ही होगा कि कैसे हम लोगो को अपना कार्यक्रम बदलना पड़ा और लाचेन जाने के बजाय हम लाचुंग पहुँच गए । हमारे आदरणीय दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने एक बार कहा था कि "मनुष्य को जीवन में कठिनाइयों की आवश्यकता होती है क्योंकि वे सफलता का आनंद लेने के लिए आवश्यक हैं।" शायद इसीलिए हम खुशी-खुशी अपनी परिवर्तित यात्रा पर नए जोश और नए उत्साह के साथ चल पड़े

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
अपनी परिवर्तित यात्रा पर नए जोश और नए उत्साह के साथ चल पड़े

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तीसरा दिन:

पिछली रात जब हम अपने होटल के कमरे में रात का भोजन कर के वापस आये, तो अचानक से बिजली गुल हो गयी जिसके कारण सब कमरों की बत्तियां बुझ गयी । शुरू में मुझे कुछ खास चिंता नहीं थी क्योंकि पहाड़ों में ये होना आम बात हैं, हालाँकि जब अगले कुछ घंटों तक बिजली नहीं आयी, तो मुझे भी चिंता होने लगी । बिजली न होने का मतलब फोन चार्ज नहीं होगा, कैमरा बैटरी चार्जिंग नहीं होगी , जिसका मतलब है कि कोई फोटो नहीं निकाल पायेंगे। हे भगवान ! ऐसा मत करना हम गरीबो के साथ । पूरी रात इसी चिंता में ठीक से सो ही नहीं पाया क्योंकि थोड़ी-थोड़ी देर बाद जाँचता रहा कि बिजली आई या नहीं । आखिरकार कब मेरी आँख लग गयी पता ही नहीं चला, आँख तो मोबाइल के अलार्म की खनखनाती आवाज़ से खुली। आँख खुलते ही मैंने सबसे पहले देखा... बिल्कुल ठीक समझे आप .. बिजली आयी कि नहीं । हाय रे किस्मत बिजली अभी भी नहीं थी... हे भगवान ! बचा लो !

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एक झलक होटल की खिड़की से ।

 

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अब जब बिजली नहीं थी तो नहाने के लिए गरम पानी भी नहीं था । मैंने होटल के कर्मचारियों को गर्म पानी की व्यवस्था करने के लिए बुलाया क्योंकि बिना बिजली के वॉटर हीटर किसी काम का नहीं है। इस बीच मैं रिसेप्शन काउंटर पर गया, जहां मैंने देखा कि दो होटल के मेहमान अपने मोबाइल चार्ज कर रहे थे। पहले तो मैं चौंक गया लेकिन खुश भी हो गया (उन्होंने मुझे बताया कि कुछ बिजली के पॉइंट इनवर्टर से जुड़े हुए हैं इसलिए चार्ज यहां उपलब्ध है) मैं ख़ुशी से दौड़ कर अपने कमरे में वापस आया और मेरी बेटी को बुलाया "बेटा जल्दी अपना फोन और चार्जर निकलो चार्जिंग का जुगाड़ हो गया है।" और कुछ ही समय में मैं अपने फोन और चार्जर के साथ प्लग प्वाइंट के पास खड़ा हो गया। बॉस अपना काम हो गया, हो गई तेरी बल्ले बल्ले गाते हुए दिल ख़ुशी से गार्डन-गार्डन हो गया।😃

बिजली नहीं होने और फोन चार्ज करने की गाथा के इस सारे नाटक में, मैं इस जगह के बारे में बात करना ही भूल गया जहाँ हम कल रात उतरे थे। जी हां, इस खूबसूरत जगह को लाचुंग कहते हैं ।

 

सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
लाचुंग

 

लाचुंग:

लाचुंग एक खूबसूरत पहाड़ी शहर है, जो लाचुंग चू (नदी) के किनारे विशाल पहाड़ों के बीच 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो गांव को दो भागों में विभाजित करती है, यह लोकप्रिय पहाड़ी शहर अपने सेब, आड़ू और खुमानी के लिए प्रसिद्ध है। यहां के प्रमुख आकर्षणों में लाचुंग मठ (जो संयोग से हम नहीं जा सके क्योंकि यह कोविड दिशानिर्देशों के कारण बंद था) और हस्तशिल्प केंद्र शामिल हैं। लाचुंग शहर को जो चीज वास्तव में अद्वितीय बनाती है वह यह है कि गांव अभी भी पुरानी सिक्किमी परंपराओं से रहता है। उदाहरण के लिए यह राज्य का एकमात्र स्थान है जो अभी भी जुम्सा नामक स्व-शासन की एक अनूठी प्रणाली का पालन करता है, जहां ग्रामीणों के विवादों को पिपन की अध्यक्षता में एक निर्वाचित निकाय द्वारा हल किया जाता है। लाचुंग में अधिकांश पारंपरिक घर देवदार की लकड़ी से बने हैं। लाचुंग आमतौर पर युमथांग घाटी और जीरो पॉइंट जाने वालों के लिए बेस टाउन है।

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लाचुंग गांव में लकड़ी का घर

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कहानी हमारी यात्रा की :

आज हमारी योजना युमथांग घाटी की यात्रा करने की थी, लेकिन इससे पहले कि मैं युमथांग घाटी की अपनी यात्रा के बारे में लिखना शुरू करूं मैं कुछ कबूल करना चाहता हूं । विभिन्न यूट्यूब वीडियो और तस्वीरें देखने के बाद मुझे युमथांग घाटी कुछ ख़ास नहीं लगी, शायद इसीलिए मैं कभी भी युमथांग घाटी नहीं जाना चाहता था, लेकिन फिर रजत भाई, जिन्होंने मेरे लिए टैक्सी और होटल की व्यवस्था की थी, ने मुझे समझाया कि मुझे इस घाटी का दौरा क्यों करना चाहिए। बस भाई ने बोला और बीड़ू, अपुन  घाटी की सैर को निकल लिए ।😃

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हम सुबह 7.30 बजे अपने होटल से निकल पड़े थे । बारिश की हल्की बूंदा-बांदी के साथ सुबह बहुत ठंडी और सुखद थी। लकड़ी के छोटे-छोटे रंग-बिरंगे गाँव के घर बहुत सुन्दर लग रहे थे। यह एक रोमांचकारी अनुभव हुआ, जब हमारी कार नदी के किनारे चलती हुई जा रही थी और फिर धातु के पुल पर क्लैंग-क्लैंग वाइब्रेटिंग साउंड, फहराते रंग-बिरंगे प्रार्थना झंडे और नीचे बहती नदी को पार करती जा रही थी, यह सब देखते हुए दिल से एक ही आवाज़ निकलती है अरे वाह !

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मेटल ब्रिज, क्लैंग क्लैंग वाइब्रेटिंग साउंड, फड़फड़ाते रंग-बिरंगे झंडे।

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जल्द ही हमारी कार लाचुंग गांव से निकल रही थी। जैसे ही हम युमथांग घाटी की ओर जाने के लिए गाँव से निकल रहे थे तब हम अपना परमिट जमा करने के लिए एक चेकपॉइंट पर रुक गए और सत्यापन के बाद, हम युमथांग घाटी जाने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
युमथांग घाटी

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युमथांग घाटी:

युमथांग घाटी को 'फूलों की घाटी' के रूप में भी जाना जाता है और यह शिंगबा रोडोडेंड्रोन अभयारण्य का घर है, जिसमें रोडोडेंड्रोन, राज्य फूल की चौबीस प्रजातियां हैं। फूलों का मौसम फरवरी के अंत से जून के मध्य तक होता है जब अनगिनत फूल इंद्रधनुष के बहुरंगी रंगों में घाटी को कालीन बनाने के लिए खिलते हैं। (मैं निश्चित रूप से इन फूलों को देखने के लिए फिर से आना चाहूंगा) युमथांग घाटी लाचुंग से लगभग 23 किमी दूर स्थित है जो कटाओ रेंज के कुछ लुभावने दृश्य पेश करती है। घाटी आमतौर पर सर्दियों में बर्फ से ढकी रहती है, लेकिन अप्रैल मई के दौरान रोडोडेंड्रोन अभयारण्य के कुछ अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है।

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
लुभावने दृश्य

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हालांकि साफ नीले आसमान और बर्फ से ढके पहाड़ों को देखने के लिए सितंबर से दिसंबर के बीच यात्रा की जा सकती है। जैसा कि हम सितंबर के महीने में यात्रा कर रहे थे, वास्तव में दृश्य बहुत सुंदर थे। मुझे याद है कि जब हम ड्राइव कर रहे थे तो कार की विंडशील्ड से नज़ारे लुभावने लग रहे थे लेकिन विंडशील्ड गंदी थी। मैंने अपने ड्राइवर से कांच साफ करने का अनुरोध किया, लेकिन किसी तरह मुझे लगा कि वह अनिच्छुक था, इसलिए जब हम टॉयलेट करने के लिए रुके तो मैंने कांच को साफ करना शुरू कर दिया, यह देखकर उसे शर्मिंदगी महसूस हुई होगी इसलिए उसने अपना पानी का डिब्बा निकाल कर साफ करना शुरू कर दिया। "वो क्या है न कभी कभी खुद को ही तलवार उठानी पड़ी है युद्ध लड़ने के लिए"

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चंचल बादल हमारे चारों ओर नाच रहे थे ।

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पहाड़ों के बीच विशेष रूप से सुबह की ठंडक में यह ड्राइव प्राणदायक प्रतीत हो रही थी, घुमड़ते बादल हमारे चारों ओर नाचते जा रहे थे। मेरे उत्साह का कोई ठिकाना नहीं था क्योंकि जैसा वे कहते हैं, आगाज़ ये है तो, अंजाम होगा हसीं।

अंत में इस सुंदर ड्राइव के बाद, हम लोग युमथांग घाटी के प्रवेश द्वार पर पहुँच गए । जैसे ही मैं कार से नीचे उतरा, मैंने महसूस किया कि घाटी अच्छी खासी ठंडी थी, विशेष रूप से सर्र-सर्र चल रही हवा के कारण । हरी-भरी हरियाली और खूबसूरत पहाड़ आपको खुशी से हवा में उछलने के लिए प्रोहत्साहित करते और हम वास्तव में उछल पड़े थे हवा में, यकीन न हो तो देख लो ।😃

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
वास्तव में उछल पड़े थे हवा में

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हमने कुछ समय सुंदर हरे-भरे मैदान का आनंद लेते हुए बिताया और कुछ शानदार नदी के दृश्यों का आनंद लेने के लिए नदी के किनारे चले गए। युमथांग चू नामक इस नदी की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है ।

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
खूबसूरत यादें

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शीशे की तरह साफ पानी और इसके प्रवाह की गुनगुनाती आवाज आपके मन और आत्मा को इतना सुकून देगी कि आपका इस जगह को छोड़ने का मन ही नहीं करेगा। अब चाहे वह कुछ देर के लिए आराम करना हो या कुछ खूबसूरत तस्वीरें खींचना हो ।

 

सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
शीशे की तरह साफ पानी

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युमथांग घाटी का भृमण करने के बाद लोग आमतौर पर जीरो पॉइंट पर जाते हैं।

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जीरो पॉइंट:

जीरो पॉइंट पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है क्योंकि यहां बर्फ देखने को मिलती है और यहां पर बहुत सारी खेल गतिविधियां की जा सकती हैं । जीरो पॉइंट को युम समदोंग के नाम से भी जाना जाता है, जीरो पॉइंट समुद्र तल से 15,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह यहाँ की अंतिम सैन्य चौकी है और बर्फ से ढके पहाड़ों और सुरम्य परिवेश के मनोरम दृश्य के बीच तीन नदियाँ मिलती हैं।

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
जीरो पॉइंट PC पद्मनाभ जोशी

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चूंकि यह भारत और चीन के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब स्थित है, इसलिए आगंतुकों को यहां आने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है। 25 किमी दूर युमथांग घाटी और लाचुंग से लगभग 3 से 3.5 घंटे की दूरी पर पर्यटकों को यहां पहुंचने में लगभग 1.5 घंटे लगते हैं। यहां पहुंचने के बाद इसके आगे कोई असैन्य सड़क नहीं है और इसीलिए इसे जीरो प्वाइंट कहा जाता है।

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सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
जमे हुए झरने, जीरो पॉइंट  PC- पद्मनाभ जोशी

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कभी-कभी यह संभव है कि रास्ते में अतिरिक्त बर्फ के कारण आपको बीच में ही वापिस आना पड़े, इसलिए उस संकट के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिये । यहां ड्राइविंग सुंदर और प्राचीन पर्वत स्थलों के खूबसूरत दृश्यों को दिखाती है । यदि आप भाग्यशाली हैं, तो आप एक याक को बर्फ में भी देख सकते हैं। ज़ीरो पॉइंट में शायद ही कोई हरा-भरा हिस्सा हो, सिवाय उन हिस्सों के जो बर्फ पिघलने पर दिखाई देते हैं।

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रास्तो पर बर्फ के कारन कही बार वापस आना पपड़ सकता (Pic source internet)

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जहाँ तक हमारी यात्रा की बात थी, आज जैसा कि हमने युमथांग घाटी घूमने में इतना समय बिताया था कि हमारे लिए जीरो पॉइंट पर जाना और फिर लाचुंग और फिर वहां से लाचेन की यात्रा करना काफी मुश्किल हो जाती। हम लोग ऐसे है कि कभी भी आलसी हो जाते हैं और बड़ी ही फुर्सत से उस जगह के मजे लेने लगते हैं। किसी शायर ने इसीलिए क्या खूब कहा है कि "कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता है। कहीं जमीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता"

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दोपहर के 1.30 बज रहे थे जब हम लाचुंग पहुँचे, जहाँ हमने अपना दोपहर का भोजन होटल में ही किया। भोजन के उपरांत अब हम यहाँ से लाचेन के लिए निकल पड़े, जहाँ हमारी रात में रुकने की व्यवस्था थी । लाचुंग से निकलते ही कुछ दूरी पर एक विशाल जलप्रपात है। हमने इस भीम नाला जलप्रपात में अपना छोटा सा विश्राम लिया, इसे अमिताभ बच्चन जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है, वैसे नाम इसकी ऊँचाई के कारण है।  लाचेन, लाचुंग से लगभग 2-2.5 घंटे की ड्राइव पर है। सिक्किम के किसी भी अन्य सड़क मार्ग की तरह यह मार्ग भी सुंदर था। थोड़ी और ड्राइव के पश्चात हम फिर से चुंगथांग में थे जहाँ से हम लाचेन जाने के लिए दाएँ मुड़ गए। जैसे ही हम लाचेन पहुंच रहे थे, हमें एक लंबा पुल मिला। फहराते रंग-बिरंगे झंडों के साथ यह पुल बहुत सुंदर दिखता है, मेरे कार चालक ने मुझे इस पुल के बारे में एक दिलचस्प तथ्य बताया।

क्या आप इसके बारे में जानना नहीं चाहेंगे ?

कृपया लाचेन पर मेरे अगले ब्लॉग और गुरुडोंगमार झील से वापिसी के समय की रोचक घटना को जानने के लिए हमारे साथ अगले ब्लॉग पोस्ट तक बने रहें। Click here to read next part 

 

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Traveler Tips युमथांग घाटी की यात्रा के लिए :

युमथांग घाटी की आपकी यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण परमिट है, चूंकि घाटी चीन की सीमा के करीब स्थित है, इसलिए पूरा क्षेत्र सेना के नियंत्रण में है और एक पर्यटक के रूप में इसे देखने के लिए संरक्षित क्षेत्र में परमिट की आवश्यकता होती है। इसलिए अपने यात्रा की योजना बनाते समय इसे गंगटोक पर्यटन कार्यालय के जिला प्रशासनिक केंद्र मंगन या चुंगथांग उप-मंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय से प्राप्त करना न भूलें या आप अपने टूर प्लानर से इसे आपके लिए व्यवस्था करने के लिए भी कह सकते हैं।

सुनिश्चित करें कि आप जिस भी मौसम में युमथांग जा रहे हैं, उस मौसम के बावजूद आप गर्म कपड़े ले जाएं क्योंकि मौसम वास्तव में वहां ठंडा हो सकता है खासकर जब आप जीरो पॉइंट पर जा रहे हों।

अपनी प्राथमिक चिकित्सा किट अवश्य साथ रखें । विशेष रूप से वे जो आपको एक्यूट माउन्टेन सिकनेस की बीमारी (AMS) के लिए आवश्यक हो सकती है।

यात्री लाचुंग में एक रात के लिए रुकना पसंद करते हैं और सुबह जल्दी युमथांग के लिए अपनी यात्रा शुरू करते हैं, क्योंकि शाम लगभग 5:30 बजे शाम को गहरा और धूमिल हो जाता है।

ज्यादातर युमथांग वैली और ज़ीरो पॉइंट टूर की योजना इस तरह से बनाई जाती है कि आपको लाचुंग से युमथांग- ज़ीरो पॉइंट-लाचुंग-लाचेन तक यात्रा करनी पड़ती है या यह लाचुंग-युमथांग-ज़ीरो पॉइंट-लाचुंग-गंगटोक तक यात्रा करनी पड़ती है, जिसका अर्थ यह बनता है की आप सड़क पर लंबी समय के लिये आप यात्रा कर रहे होते हैं (इसलिए यात्रा को सुबह जल्दी शुरू करने की जरूरत है)

होम स्टे साधारण होते हैं इसलिए आलीशान कमरों की अपेक्षा बिल्कुल भी न करें।

हमें होटल में वाईफाई नहीं दिया गया था, लेकिन मोबाइल डेटा काम करता है।

सीरीज़

Sikkim Series

  1. 1सिक्किम सीरीज | मुंबई से गंगटोक | DAY-1
  2. 2सिक्किम सीरीज | गंगटोक से लाचुंग | Day-2
  3. 3सिक्किम सीरीज । लाचुंग-यूमथांग घाटी-लाचेन । Day 3
  4. 4सिक्किम-सीरीज | गुरुडोंगमार झील | Day- 4
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Aashish Chawla

Written by

Aashish Chawla

Hi, I am Aashish Chawla — The Weekend Wanderer. Weekend wandering is my passion: I love connecting with new places and meeting new people. Through my blogs I will introduce you to lesser-explored places that may be very near you, yet undiscovered. Come, let's wander into the wilderness of nature!

Other than travelling, I love writing poems.

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